डॉ. अनिल सिंघवी, MD · 35+ साल का अनुभव · मध्य प्रदेश के पहले हेमेटोलॉजी सेंटर के संस्थापकइंदौर में क्लिनिक आकर या वीडियो कॉल पर सलाह लें।
ब्रेस्ट कैंसर तब शुरू होता है जब स्तन की कोशिकाएँ असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, ज़्यादातर दूध की नलियों या ग्रंथियों में। ज़्यादातर मरीज़ों को सबसे पहले बिना दर्द की गाँठ महसूस होती है, हालाँकि निप्पल या स्तन की त्वचा में बदलाव भी शुरुआती संकेत हो सकते हैं। यह ज़्यादातर महिलाओं को होता है, पर पुरुषों को भी हो सकता है।
इलाज के नतीजे बहुत बेहतर हो गए हैं। जल्दी पता चलने और आधुनिक इलाज से (जो ट्यूमर के प्रकार और स्टेज के हिसाब से तय होता है), जल्दी पकड़ में आई ज़्यादातर महिलाएँ पूरी तरह ठीक होकर सामान्य ज़िंदगी में लौट आती हैं।
जाँच डॉक्टर के परीक्षण से शुरू होती है, फिर स्तन की मैमोग्राफ़ी या सोनोग्राफ़ी होती है। सुई से बायोप्सी करके बीमारी पक्की की जाती है, और इससे ट्यूमर का प्रकार, ग्रेड, हार्मोन रिसेप्टर और HER2 की स्थिति पता चलती है। इसी जानकारी से तय होता है कि कौन-सा इलाज सबसे अच्छा काम करेगा। स्टेज जानने के लिए आगे स्कैन किए जाते हैं।
इलाज हर मरीज़ के हिसाब से तय होता है। स्टेज और ट्यूमर के प्रकार के अनुसार इसमें ऑपरेशन, कीमोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी, एंटी-HER2 दवाइयों जैसी टारगेटेड थेरेपी, और रेडिएशन शामिल हो सकते हैं। ज़्यादातर मरीज़ों को कीमोथेरेपी या टारगेटेड थेरेपी डे-केयर में दी जाती है, भर्ती होने की ज़रूरत नहीं पड़ती। हमारा ध्यान सिर्फ़ ठीक करने पर नहीं, बल्कि पूरे इलाज के दौरान आपकी ज़िंदगी को अच्छा बनाए रखने पर भी है।
यह जानकारी सिर्फ़ आम जानकारी के लिए है, यह डॉक्टर से सलाह की जगह नहीं ले सकती। हर मरीज़ अलग होता है, और सही इलाज पूरी जाँच के बाद ही तय किया जा सकता है।
डॉ. अनिल बताते हैं कि नए इलाज से कैंसर अब कैसे ठीक हो सकता है।
कैंसर और खून की बीमारियों के इलाज में 30 साल से ज़्यादा अनुभव वाले विशेषज्ञ से सलाह लें। सेकंड ओपिनियन और ऑनलाइन कंसल्टेशन भी उपलब्ध है।
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